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झाबुआ के ‘कड़कनाथ’ पर बर्ड फ्लू का साया

झाबुआ/भोपाल, 13 जनवरी | मध्य प्रदेश में लगातार बर्ड फ्लू का दायरा बढ़ता जा रहा है, अब तो झाबुआ के कड़कनाथ पर भी बर्ड फ्लू का साया मंडराने लगा है। यहां के कड़कनाथ में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके चलते संक्रमित क्षेत्र में आगामी तीन माह तक के लिए कुक्कुट के व्यापार और परिवहन पर रोक लगाई गई है। यहां के दो हजार चूजों का ऑर्डर तो क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने दिया था। आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी में बताया गया है कि झाबुआ जिले के ग्राम रूंडीपाड़ा में कड़कनाथ मुर्गी में एच5एन1 वायरस मिला है। झाबुआ कलेक्टर रोहित सिंह को भारत सरकार के बर्ड फ्लू एक्शन प्लान 2021 के अनुसार निस्तारण, चारा-दाना, अंडे आदि को नष्ट और प्रभावित स्थल को सेनिटाइज और डिसइन्फेक्ट करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रभावित स्थल से एक किलोमीटर की परिधि को संक्रमित क्षेत्र मानते हुए सभी प्रकार के कुक्कुट की कलिंग (नष्ट) की जायेगी।

वहीं एक से नौ किलोमीटर की परिधि को सर्विलांस जोन मानते हुए सेम्पल कलेक्शन किया जायेगा। संक्रमित क्षेत्र में अगले तीन माह तक कुक्कुट और कुक्कुट उत्पाद की रिस्टॉकिंग और कुक्कुट परिवहन पर प्रतिबंध रहेगा। झाबुआ जिले के कुक्कुट बाजार और पोल्ट्री फार्मों को संक्रमण रहित किया जायेगा।

सूत्रों का कहना है कि झाबुआ के थांदला क्षेत्र के रूंपीपाड़ा स्थिति विनेाद के फार्म हाउस में मृत कड़कनाथ के शव के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, उसकी रिपोर्ट आ गई है। यह वह फार्म है जिससे दो हजार चूजे का आर्डर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने दिया था। मौसम के ठीक हेाने पर इन चूजों को महेंद्र सिंह धोनी के रांची स्थित फार्म पर भेजा जाना था।

बताया गया है कि रूंडीपाड़ा के फार्म में अब तक बड़ी संख्या में कुक्कुट सामग्री को नष्ट कर दफनाया जाएगा। इसकी झाबुआ प्रशासन और पशुपालन विभाग ने तैयारी शुरु कर दी है। इसके लिए गड्ढा किया जाएगा, कुक्कुट सामग्री को दफनाने के बाद चूना डालकर कांटे बिछाए जाएंगे।

प्रदेश में अब तक 19 जिलों में बर्डफ्लू पाया गया है। इंदौर, मंदसौर, आगर, नीमच, देवास, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, गुना, शिवपुरी, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, भोपाल, होशंगाबाद, अशोकनगर, दतिया और बड़वानी में एच5एन8 की पुष्टि हुई है। प्रदेश के 42 जिलों से लगभग 2100 कौवों और जंगली पक्षियों की मृत्यु की सूचना मिली है। विभिन्न जिलों से 386 सैंपल राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा रोग अनुसंधान प्रयोगशाला भोपाल को भेजे गये हैं।

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